Renunciation of Mother Sati and 51 Shakti Peeth | माता सती का देह त्याग और 51 शक्ति पीठ


माता सती का देह त्याग




What Are The 51 Shakti Peet | 51 शक्तिपीठ क्या हैं

ब्रह्मा पुत्र दक्ष प्रजापति देवी महामाया को अपने बेटी के रूप में पाना चाहते थे, और इसलिए वह कठोर तप करने लगे| दक्ष के तप से तुष्ट होकर माता ने उन्हें वरदान दिया- कि वह दक्ष प्रजापति के घर में उनके बेटी के रूप में जन्म लेंगी पर अगर कभी भी उनका अपमान हुआ तो, वह अपने प्राण त्याग देंगी| और दुखपुर्वक वास्तव में ऐसा ही हुआ|


दक्ष नंदिनी की शादी हुई देवादिदेव महादेव के साथ| परंतु दक्ष के प्रबल अहंकार और प्रतिपति के कारण महादेव के साथ उनका विवाद हो गया|



एक बार राजा दक्ष ने एक विराट यज्ञ का आयोजन किया| उस यज्ञ में उन्होंने सबको न्योता दिया, पर माता सती और महादेव को न्योता नहीं दिया|


लेकिन माता सती पिता के घर में इतने बड़े यज्ञ का आयोजन हो रहा सुनकर वहां जाने के लिए व्याकुल हो उठी| महादेव के मना करने के बाद भी वह वहां पर चली गई|


पर पिताने इतने दिनों के बाद पुत्री को देखकर ना तो उनका आदर किया ना किया सम्मान, उल्टा वे पुत्री के सामने ही महादेव का प्रचंड अपमान करने लगे|


पिता के मुख से अपने पति की निंदा माता सहन नहीं कर पाई और उन्होंने यज्ञ की अग्नि में ही अपने प्राणों की आहुति दे दी| महादेव को माता के देत्या का संवाद मिला, तो वह गुस्से से आगबबूला होकर, उन्होंने अपने ही जटा से प्रबल शक्तिशाली वीरभद्र को प्रकट किया|


वीरभद्र ने महादेव के निर्देश से दक्ष प्रजापति के पुरे यज्ञ को हस-नहस कर दिया| दुख में विभोर महादेव सती माता के देह को लेकर तांडव करने लगे और पूरी सृष्टि उलट-पलट होने लगी|


महादेव के इस तांडव रूप को शांत करने के लिए प्रभु विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता के देह का भाग-भाग कर दिया|


माता सती के देखंड जिस-जिस स्थान पर गिरे वही स्थान हो उठे महाशक्ति पीठ|



माता सती का देह त्याग



51 शक्तिपीठों के नाम है:



  • हिंगोला 
  • करवीर
  • सुगंधा
  • अमरनाथ
  • ज्वालामुखी
  • जालंधर
  • वैद्यनाथ
  • नेपाल
  • मानस
  • विरजा खेत्र 
  • गंडकी
  • बहुला
  • उज्जैनी
  • चट ग्राम
  • त्रिपुरा 
  • त्रिश रोता
  • कामाख्या
  • खीर ग्राम
  • कालीघाट
  • प्रयाग
  • जयंती
  • की
  • वाराणसी
  • कन्याश्रम
  • कुरुक्षेत्र
  • मनी बेड
  • श्री हट
  • कांजी
  • कॉल माधव 
  • शेल
  • रामगिरी
  • वृंदावन
  • अनल
  • पंच सागर  
  • करतोआतट 
  • श्री पर्वत 
  • विवाश 
  • प्रभास  
  • भैरव पर्वत 
  • जनताने 
  • गोदावरी तट 
  • रत्नावली 
  • मिथिला 
  • नलहटी 
  • कर्नाट 
  • बक्रेश्वर 
  • जसोर 
  • अट्ठाहोम 
  • नंदीपुर 
  • लंका 
  • विराट 


Details Of 51 Shakti Peet | 51 शक्तिपीठों का विवरण



Maa Kamakhya
Maa Kamakhya Temple, Guwahati, Assam



कामाख्या शक्तिपीठ, 51 शक्तिपीठों में से एक, बहुत प्रसिद्ध और चमत्कारी है। कामाख्या देवी का मंदिर अघोरियों और तांत्रिकों का गढ़ माना जाता है। असम की राजधानी दिसपुर से लगभग 7 किमी दूर स्थित यह शक्तिपीठ नीलांचल पर्वत से 10 किमी दूर है। कामाख्या मंदिर को सभी शक्तिपीठों का महापीठ माना जाता है। आपको इस मंदिर में देवी दुर्गा या माँ अम्बे की कोई मूर्ति या तस्वीर नहीं दिखाई देगी। वल्कि मंदिर में एक कुंड है जो हमेशा फूलों से ढका रहता है। इस कुंड से हमेशा पानी निकलता है। चमत्कारों से भरे इस मंदिर में देवी की योनि की पूजा की जाती है| अधिक पढ़ें




Hinglaj Temple
Hinglaj Temple, Pakistan

हिंगलाज- हिंगलाज पाकिस्तान के बंदर शहर, कराची से 128 किलोमीटर अंदर है| हिंगुला मां के मंदिर पर माता का ब्रह्मरंध्र  गिरा था| देवी कटारी यहां की अधिष्ठात्री देवी हैं भैरव हैं भीमलोचन| यहां पर माता  नानी मां या महामाई नाम से जानी जाती है| अधिक पढ़ें


शर्करार: कराची के शुक्र स्टेशन से कुछ ही दूर है यह स्थान है| यह यहाँ पर माता का तीसरा आँख गिरा था| देवी है महिषमरदिनी, और भैरव हैं क्रोधित| अधिक पढ़ें


सुगंधा: बांग्लादेश के बरिशाल शहर से 13 किलोमीटर दूर, शिकारपुर के सोन नदी के पार है सुगंधा| यहां पर माता का नासिक गिरा था| देवी सुनंदा नाम से जानी जाती हैं, और भैरव हैं त्रम्बक| अधिक पढ़ें


अमरनाथ: कश्मीर के अमरनाथ गुफा में है यह मंदिर| गुफा के अंदर तुषार लिंग के पास जो तुषार पिंड है| वहां पार्वती या महामाया के नाम से जानी जाती हैं माता| यहां पर माता का कंठ या गला गिरा था| देवी महामाया और भैरव श्री शनेश्वर नाम से स्थापित हैं| अधिक पढ़ें


ज्वालामुखी: पठानकोट के ज्वालामुखी स्टेशन से 13 माइल की दूरी पहाड़ के ऊपर जंगल में भैरव मंदिर है यहां पर माता का कोई मूर्ति नहीं है पर पत्थर के बीच में से आपकी शिखा निकलती है वह ज्योति ही माता की मूर्ति की तरह पूजी जाती है सती माता की जीव गिरा था स्थान पर देवी यहां सिद्धि दा और भैरव उन्मत्त | अधिक पढ़ें


जालंधर: पंजाब के जालंधर स्टेशन से जाना पड़ता है जालंधर पीठ में वहां पर है काल भैरव  एवं महावीर के मंदिर माता का एक्शन यहां गिरा था देवी यहां त्रिपुरमालिनी भैरव भीषण| अधिक पढ़ें


बैद्यनाथ: बिहार के बैद्यनाथ धाम या देवघर में मां का ह्रदय गिरा था रावण ने जहां महादेव को रखा था वहीं पर ही मां का ह्रदय गिरा था वैद्यनाथ सिर्फ शिव पीठ ही नहीं शक्ति पीठ भी है देवी यहां पर जय दुर्गा और  भैरवबैद्यनाथ| अधिक पढ़ें


नेपाल: यहां पर माता का घुटना गिरा था नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर के पास है गुंजेश्वरी मंदिर यहां माता महाशीरा भैरव कपाली| अधिक पढ़ें


मानस: तिब्बत के अंदर कैलाश पर्वत के निचले हिस्से में है मानस सरोवर यहां एकशीला में माता विराजमान है यहां पर माता का डायना हाथ गिरा था माता यहां दक्षायणी भैरव है अमर| अधिक पढ़ें


उत्कल: पूरी मंदिर के अंदर ही है यह शक्तिपीठ यहां माता का  नाभि गिरा था मां यह विमला भैरव है जगन्नाथ| अधिक पढ़ें

गंडकी: नेपाल और तिब्बत के सीमा में है यह शक्तिपीठ यहां माता का गला गिरा था मां यहां गंदगी चंडी भैरव चक्रपाणि| अधिक पढ़ें

बहुला: पश्चिम बंगाल के वर्तमान जिले के कटवा से 8 किलोमीटर दूर के 2 ग्राम के अजय नदी के पास है यह शक्तिपीठ यहां माता के बाया हाथ गिरा था देवी यहां बहुला  भैरव वीरू क| अधिक पढ़ें

उज्जैनी: बर्धमान जिला के गुस्कारा स्टेशन से 16 किलोमीटर दूर है | अधिक पढ़ें

Post a Comment

और नया पुराने